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सच्चा लोकतंत्र : सौरभ जी, आप बार काउंसिल ऑफ राजस्थान चुनाव में सदस्य पद के प्रत्याशी हैं। सबसे पहले तो यह बताइए कि अगर आप इस पद हेतु चुने जाते हैं तो आपकी क्या प्राथमिकताएँ रहेंगी?

सौरभ सारस्वत : देखिए, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान, राजस्थान के अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व करती है। सदस्य बनने के उपरांत मेरी प्राथमिकता रहेगी कि इसके सभी फैसले अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लिए जाएँ। इसके अलावा अधिवक्ताओं और उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा जिसमें परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएँ शामिल हों, प्रदान करना मेरा लक्ष्य रहेगा।

सच्चा लोकतंत्र : राजस्थान के अधिवक्ता बड़े लंबे समय से अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार के समय यह एक्ट पास भी कर दिया गया था तथा वर्तमान में यह केंद्र स्तर पर लंबित है। इस समय केंद्र में आपकी सरकार है तथा वर्तमान कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल भी राजस्थान के बीकानेर जिले से हैं। आपके बीसीआर सदस्य बनने की अवस्था में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट पास करवाने में आपकी क्या भूमिका रहेगी?

सौरभ सारस्वत : देखिए, केंद्रीय स्तर से अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करवाने में अभी कुछ कानूनी, प्रशासनिक और व्यावहारिक दिक्कतें हैं। बार काउंसिल और सरकार के बीच अभी कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। फिर भी बार काउंसिल ऑफ राजस्थान द्वारा इसे लागू करवाने के लिए जो भी आवश्यक और व्यावहारिक कदम उठाए जाने हैं, उसके लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास किए जाएँगे।

सच्चा लोकतंत्र : राजस्थान के अधिवक्ताओं की यह पीड़ा और शिकायत रही है कि बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के स्तर से उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाता है। उनके फोन नहीं उठाए जाते, पत्रों का जवाब नहीं दिया जाता है। जिला एवं तहसील स्तर के अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान हेतु आप क्या कदम उठाएँगे जिससे उनकी समस्याओं का उचित समाधान हो सके?

सौरभ सारस्वत : हाँ, यह बात सही है कि बार काउंसिल राजस्थान के स्तर से अधिवक्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध और पूर्ण रूप से निराकरण नहीं हो पाता है। इसके लिए यह प्रयास रहेगा कि प्रत्येक बार स्तर पर बार काउंसिल का प्रतिनिधि नियुक्त किया जाए, जिसके माध्यम से अधिवक्ता अपनी बात बार काउंसिल राजस्थान तक पहुँचा सकें। इसके अलावा एनरोलमेंट की प्रक्रिया जो वर्तमान में थोड़ी लंबी है, उसका भी सरलीकरण करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ-साथ बार काउंसिल के समस्त कार्यों की पूरी प्रक्रिया का डिजिटलीकरण, सिंगल विंडो सिस्टम करने का प्रयास रहेगा। साथ ही, प्रत्येक कार्य हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश और हेल्पडेस्क की भी व्यवस्था की जाएगी जिससे अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान समयबद्ध और सुचारु रूप से हो सके।

सच्चा लोकतंत्र : यदि आप सदस्य पद हेतु चुने जाते हैं तो अधिवक्ताओं के हित के लिए आपके पास क्या प्लान है?

सौरभ सारस्वत : अगर राजस्थान के विद्वान अधिवक्ता मुझे सदस्य पद पर सेवा का अवसर प्रदान करते हैं तो मैं राजस्थान के अधिवक्ता वर्ग के कल्याण के लिए बेहतर कार्य करने का प्रयास करूँगा। वेलफेयर फंड को मजबूत बनाकर अधिवक्ताओं और उनके परिवार का सामूहिक जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा करवाना भी मेरे एजेंडे में शामिल है। जिससे किसी अनहोनी अथवा गंभीर बीमारी की स्थिति में अधिवक्ता साथी और उसके परिवार पर किसी तरह का आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही महिला अधिवक्ताओं और नए आने वाले युवा अधिवक्ताओं के हितों के लिए आवश्यकतानुसार कार्य किए जाएँगे।

सच्चा लोकतंत्र : आपने युवा अधिवक्ताओं के कल्याण की बात की। आपके पास युवा अधिवक्ताओं हेतु क्या योजनाएँ या प्लान हैं?

सौरभ सारस्वत : प्रैक्टिस शुरू करने के दौरान युवा अधिवक्ताओं के सामने कई तरह की समस्याएँ आती हैं। जिनमें मुख्य हैं – न्यायालय की कार्यवाही की जानकारी का अभाव, प्रतिदिन का खर्च चलाने की समस्या, चैंबर की समस्या आदि। इसके लिए मेरा प्रयास रहेगा कि युवा अधिवक्ताओं के लिए नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाए। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा रिटायर्ड एवं सिटिंग जज साहिबानों का सहयोग लेकर युवा अधिवक्ताओं को न्यायालय की कार्यवाही से अवगत कराने का सार्थक प्रयास किया जाए। इसके साथ-साथ नए युवा अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ जोड़कर उनके लिए कुछ मासिक खर्च की व्यवस्था की जाए।

सच्चा लोकतंत्र : आपने नए एवं युवा अधिवक्ताओं के लिए चैंबर की बात की। लेकिन वास्तविकता में न्यायालय परिसरों में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर की समस्या एक बड़ी समस्या है। जगह का भी अभाव है। ऐसे में आप युवा अधिवक्ताओं को स्थान किस प्रकार उपलब्ध करवा पाएँगे?

सौरभ सारस्वत : आपका यह कहना सही है कि न्यायालय परिसरों में जगह की समस्या है। इसके लिए प्रशासन से बात करके न्यायालय के आसपास पड़ी खाली जगह के उपयोग हेतु अनुमति लेकर तथा वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सहयोग लेकर युवा अधिवक्ताओं के बैठने की व्यवस्था करने का प्रयास रहेगा। साथ ही नए बनाए जा रहे न्यायालय परिसरों में भी हमारा यह प्रयास रहेगा कि अधिवक्ताओं की संख्या के अनुसार पर्याप्त संख्या में चैंबर अधिवक्ताओं को उपलब्ध करवाए जाएँ।